HIV संक्रमित करना, हत्या की कोशिश नहीं- दिल्ली हाई कोर्ट
01-01-1970
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नई दिल्ली, विनीत त्रिपाठी। एचआइवी संक्रमित व्यक्ति द्वारा दुष्कर्म करने के मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। न्यायमूर्ति विभू बाखरू की पीठ ने कहा कि याची को आइपीसी की धारा 307 ([हत्या की कोशिश)] के तहत नहीं, बल्कि धारा 270 ([संक्रमण फैलाने)] के तहत दोषषी ठहराया जा सकता है। पीठ ने याची को दुष्कर्म के साथ हत्या की कोशिश के आरोप में निचली अदालत की सुनाई सजा से बरी कर दिया। हालांकि, दुष्कर्म व अन्य अपराध के लिए सुनाई गई सजा को बरकरार रखा है। दोषषी को सौतेली बेटी के साथ दुष्कर्म करने के आरोप में निचली अदालत ने सजा सुनाई थी।
न्यायमूर्ति विभु बाखरू की पीठ ने स्पष्ट किया कि दुष्कर्म करने के समय संक्रमित व्यक्ति का मकसद हत्या करने का नहीं था और उसने हत्या करने के इरादे से पी़ि़डता को चोट भी नहीं पहुंचाई है। अदालत ने कहा कि संक्रमित व्यक्ति के दुष्कर्म करने से ऐसा नहीं है कि पी़ि़डता भी संक्रमित हो जाए। अगर, पीड़िता संक्रमित हो भी जाती है तो जरूरी नहीं है कि उसकी मौत हो जाए। इन सबका कोई वैज्ञानिक प्रमाण भी नहीं है।